December 7, 2022
Bhartiya Harit Kranti Ke Nayak Kaun The | भारतीय हरित क्रांति के नायक कौन थे

Bhartiya Harit Kranti Ke Nayak Kaun The | भारतीय हरित क्रांति के नायक कौन थे

Bhartiya Harit Kranti Ke Nayak Kaun The :- दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम लोग जानेंगे कि भारतीय हरित क्रांति के नायक कौन थे और भारत में हरित क्रांति के जनक किसे कहते हैं?. तो दोस्तों अगर आपको मालूम नहीं है और जानना चाहते हैं Bhartiya Harit Kranti Ke Nayak Kaun The. तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को और जानते हैं हरित क्रांति के जनक किसे माना जाता है,

Bhartiya Harit Kranti Ke Nayak Kaun The | भारतीय हरित क्रांति के नायक कौन थे?

डॉ.एम.एस. स्वामीनाथन ने ही वर्ष 1960 मे हरित क्रांति की शुरुआत किये थे । और इन्हीं को हरित क्रांति का नायक माना जाता है।

भारत में हरित क्रांति के समय खाद्य पदार्थ की उत्पादन में काफी ज्यादा वृद्धि देखने को मिली। हरित क्रांति के दौरान भारत जैसा विकासशील देश खाद्य पदार्थों के लिए दूसरे देशों पर से निर्भरता कम कर पाया। यह 1960 के दशक मे शुरू हुआ जिसका प्रभाव आज भी हम देख सकते हैं।

हरित क्रांति के बदौलत भारत के राज्य पंजाब, हरियाणा और यूपी मे खाद्य पदार्थों के उत्पादन मे वृद्धि काफी आई जिससे भारत के गेहूं उत्पादन करने वाले देश में दूसरे स्थान पर चला गया। गेहूं के अधिक उत्पादक में वृद्धि करने वाली चीज उनके किस्में थीं जिन्हें कई वैज्ञानिकों द्वारा विकसित करवाया गया जिनमें भारतीय के कृषि विज्ञानिक आनुवंशिकीविद् एम.एस स्वामीनाथन, वहीं अमेरिकी देश के कृषि विज्ञानिक डॉ. नॉर्मन बोर्लो और अन्य आईसीएआर लोग शामिल थे।

हरित क्रांति के जनक किसे कहते हैं?

भारत में हरित क्रांति के जनक नॉरमन बोरलॉग को माना जाता है लेकिन हरित क्रांति लाने का मुख्य श्रेय सी सुब्रमण्यम को दिया जाता है क्योंकि इन्होंने ही हरित क्रांति को लाने में सबसे ज्यादा योगदान दिया।

भारत में हरित क्रांति का श्रेय किस वैज्ञानिक को जाता है?

हरित क्रांति का श्रेय सी सुब्रमण्यम को दिया जाता है सी सुब्रमण्यम एक बहुत बड़े जाने माने वनस्पति विज्ञानी थे।

हरित क्रांति क्या है?

हरित क्रांति वह क्रांति है जिसने कृषि खाद्य  उत्पादन में वृद्धि लाई। भारत में हरित क्रांति को फेसर नारमन बोरलॉग द्वारा वर्ष (1966-1967) को शुरू किया गया था। हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य था कि भारत खाद्य पदार्थ की क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने। हरित क्रांति के बदौलत भारत गेहूँ, बाजरा, धान, मक्का तथा ज्वार के उत्पादन में शीर्ष स्थान पर चला गया।

हरित क्रांति के फायदे और नुकसान

हरित क्रांति के फायदे :- हरित क्रांति के फायदे यह था की भारत खाद्य पदार्थ के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गया। हरित क्रांति के बाद भारत में फ़सलों के उत्पादन में वृद्धि हुई और भारत में गेहूँ, बाजरा, धान, मक्का तथा ज्वार का उत्पादन तेजी से बड़ा।

हरित क्रांति के नुकसान:- हरित क्रांति के दौरान रसायनिक कीटनाशकों और कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता था जिसके वजह से  मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती थी.

विश्व में हरित क्रांति की शुरुआत कब हुई?

हरित क्रांति को वर्ष 1960 के दशक में Norman Borlaug द्वारा शुरू किया गया था। Norman Borlaug को ही विश्व के हरित क्रांति के जनक माना जाता है और इन्हें (Father of Green Revolution) बोला जाता है।

हरित क्रांति की शुरुआत किस देश से हुई?

हरित क्रांति की शुरुआत अमेरिका से अक्टूबर,  वर्ष 1968 से हुई।

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत कहां से हुई?

भारत में पंजाब राज्य से हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी। जिसे वर्ष 1960 के दशक से शुरू किया गया।

हरित क्रांति शब्द किसने दिया?

हरित क्रांति शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम विलियम गौड ने किया था।

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Video Source By :- Aryavart Study

[ अंतिम विचार ]

दोस्तों अब आशा है कि आपको मालूम चल गया होगा भारतीय हरित क्रांति के नायक कौन थे . तो यदि आपको यह आर्टिकल पसंद आया है और आप जान चुके हैं कि Bhartiya Harit Kranti Ke Nayak Kaun The. तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं. और इस आर्टिकल को शेयर करना ना भूलें..धन्यवाद

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